माना मैं लेखक नहीं,पर ये दुनिया लिखने पर मजबूर करती है..
चाहती तो हूँ सब कुछ छुपा लू दिल में. पर ये आँखे सब उगल देने पर मजबूर करती हैं।
खुश रहती हूँ सारा दिन, पर ये रात सब उगल देने पर मजबूर हैं।
लगता तो हैं दुनिया में सरे लोग अपने हैं ,पर यही लोग इसे गलत साबित करने पर मजबूर करते हैं।
विश्वास भरोसा यकीन सारे शब्द सुनने पर तो अच्छे लगते है,
पर इन शब्दों का कोई मोल नहीं यह मानने पर मजबूर करते हैं।
और शायद इसीलिए आज के दौर में किसीका कोई नहीं होता हैं,
ये शत प्रतिशत सही हैं यह मानने मजबूर करती हैं।
माना मैं लेखक नहीं पर ये दुनिया लिखने पर मजबूर करती है..

Nice👍
ReplyDeleteNew craze ... :-P
ReplyDeleteshutuupp radha :P
DeleteDil ki baat kehne k liye lekhak hona jaruri nahi,
ReplyDeletePar bacha k rakhna kuch yaade Jo unkahi hi sahi... ;-)
:P :P
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